हमारे विषय में
शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सांस्कृतिक संरक्षण एवं जनकल्याण के प्रति समर्पित एक पंजीकृत सार्वजनिक न्यास।
हमारा दृष्टिकोण
राष्ट्रीय हिन्दू संगठन ट्रस्ट एक पंजीकृत सार्वजनिक धर्मार्थ न्यास है, जिसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सांस्कृतिक संरक्षण, महिला सशक्तिकरण एवं आपदा राहत जैसे जनकल्याणकारी कार्यों के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग का उत्थान करना है।
हमारी सेवाएँ एवं सहायता जाति, भाषा, क्षेत्र या पंथ के भेदभाव से परे, समाज के हर ज़रूरतमंद वर्ग के लिए समान रूप से उपलब्ध हैं — किसी भी लाभ हेतु किसी विशेष मत या धर्म को अपनाना आवश्यक नहीं। समरसता, संस्कार और निःस्वार्थ सेवा के माध्यम से एक सशक्त, समरस समाज का निर्माण करना हमारी प्रतिबद्धता है।
कार्यपद्धति
- साप्ताहिक हिन्दू समागम: समाज में वैचारिक जागरण और संगठन की भावना को सुदृढ़ करने के लिए नियमित साप्ताहिक बैठकें।
- अनुशासन और दायित्व: कार्यकर्ताओं में नेतृत्व क्षमता विकसित कर उन्हें समाज के प्रति अपने दायित्वों के निर्वहन हेतु प्रेरित करना।
- सामाजिक समरसता: ऊँच-नीच के भेदभाव को समाप्त कर एक संगठित और सशक्त हिन्दू समाज का निर्माण।
संगठन का स्वरूप
RHS के विभिन्न आयाम जो समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचकर उन्हें राष्ट्र कार्य से जोड़ते हैं।
संगठन विस्तार
ग्राम स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक कार्यकर्ताओं की एक व्यवस्थित श्रृंखला का निर्माण। यह ढांचा त्वरित सूचना प्रवाह, निर्णय प्रक्रिया और स्थानीय समस्याओं के समाधान में सहायक होता है।
कोष-सहयोग
संगठन की गतिविधियों और सेवा कार्यों के निर्बाध संचालन हेतु एक पारदर्शी और समर्पित आर्थिक संरचना।
सेवा प्रकल्प
समाज के वंचित वर्गों के उत्थान, शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन में निस्वार्थ सेवा भाव से सहयोग।
साप्ताहिक हिन्दू समागम
वैचारिक स्पष्टता, संगठनात्मक अनुशासन और आपसी संवाद के लिए नियमित रूप से आयोजित की जाने वाली बैठकें, जो संगठन का मूल आधार हैं।
संगठन के पंच-स्तंभ
वे मूलभूत सिद्धांत जिन पर हमारे संगठन का ढांचा और कार्यप्रणाली आधारित है।
धर्म
सनातन मूल्यों का संरक्षण और जीवन में उनका आचरण।
समरसता
समाज के सभी वर्गों के मध्य सौहार्द और बंधुत्व की भावना।
राष्ट्रबोध
मातृभूमि के प्रति समर्पण और राष्ट्र प्रथम की विचारधारा।
सेवा
समाज के वंचित वर्ग के उत्थान के लिए निस्वार्थ कर्म।
युवा नेतृत्व
राष्ट्र के भविष्य के रूप में युवाओं को दायित्व सौंपना।
राष्ट्रीय नेतृत्व
संगठन को वैचारिक दिशा और राष्ट्रनिर्माण के लिए प्रेरित करने वाला नेतृत्व।
सत्येन्द्र दुबे
संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष / मुख्य ट्रस्टीसंगठन की स्थापना के प्रणेता, जो युवाओं में राष्ट्रबोध और सनातन चेतना को सुदृढ़ करने हेतु सतत प्रयासरत हैं।
इन्द्र कुमार चतुर्वेदी
राष्ट्रीय मुख्य संरक्षकसनातन दर्शन के विद्वान, जिनका मार्गदर्शन संगठन को वैचारिक अनुशासन और स्पष्टता प्रदान करता है।
हमारा आह्वान
हमारा आह्वान है कि समाज का प्रत्येक वर्ग अपने दायित्व को समझे, राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे, और संगठन के उद्देश्यों को पूर्ण करने में सहभागी बने।
संगठन से जुड़ें