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वैचारिक नींव

प्रस्तावना

राष्ट्रीय हिन्दू संगठन की वैचारिक नींव और संकल्पना

संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम् ।

"हम सब एक साथ चलें, एक साथ बोलें, और हमारे मन एक समान होकर सत्य को जानें।" — ऋग्वेद

भारत केवल भूमि का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि एक जाग्रत सांस्कृतिक अनुभूति है। इसकी प्राण-ऊर्जा सनातन धर्म और हिन्दू संस्कृति है। सृष्टि के आरंभ से लेकर आज तक, विश्व का मार्गदर्शन करने वाले इस महान राष्ट्र का आधार ही हिन्दू समाज है।

शताब्दियों के संघर्ष, आक्रमणों और आघातों के उपरांत भी यदि हिन्दू समाज अपना अस्तित्व बचाए रख सका है, तो इसका श्रेय उन लाखों महापुरुषों, संतों, वीरों और बलिदानियों को जाता है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा की।

किंतु, वर्तमान परिदृश्य में जब भौतिकवाद, वैचारिक भटकाव, विदेशी षड्यंत्र, और संगठित रूप से हो रहे धर्मांतरण जैसे संकट हमारे समक्ष हैं, तब केवल अतीत के गौरव पर निर्भर रहकर समाज की रक्षा नहीं की जा सकती। आज समाज को विघटित करने, जातियों में बाँटने और हमारी सांस्कृतिक जड़ों से काटने के निरंतर प्रयास हो रहे हैं।

समय की माँग: एक जाग्रत और संगठित समाज

आज समय की सबसे बड़ी माँग यह है कि समूचा हिन्दू समाज अपने भेदों—जाति, भाषा, पंथ, संप्रदाय—को भुलाकर एक विशाल परिवार के रूप में संगठित हो। हमें यह समझना होगा कि यदि समाज संगठित और जाग्रत नहीं होगा, तो कोई भी सत्ता, कानून या व्यवस्था हमारी रक्षा नहीं कर सकेगी। राष्ट्र की शक्ति समाज की शक्ति में निहित है, और समाज की शक्ति संगठन में।

राष्ट्रीय हिन्दू संगठन इसी पुनीत उद्देश्य की प्रतिपूर्ति के लिए स्थापित किया गया है। यह केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक ऐसा वैचारिक और व्यावहारिक मंच है, जो समाज के प्रत्येक सदस्य को धर्म, राष्ट्र और मानवता के प्रति अपने कर्तव्य का बोध कराता है।

हमारा मार्ग

हमारा मार्ग संघर्ष का नहीं, समन्वय का है; विघटन का नहीं, निर्माण का है। हम मानते हैं कि जिस दिन हिन्दू समाज अपने घर, अपने परिवार, अपने मोहल्ले और अपने गाँव में संगठित होकर बैठना प्रारंभ कर देगा, उसी दिन से भारत पुनः अपने परम वैभव की ओर अग्रसर हो जाएगा।

संविधान की मूल प्रस्तावना
“जो महत्व शरीर में रीढ़ का होता है वही महत्व संगठन में संविधान का होता है। एक सुव्यवस्थित एवं सुव्याख्यायित संविधान से ही संगठन की दिशा एवं दशा निर्धारित होती है।”

— मा. इन्द्र कुमार चतुर्वेदी, मुख्य संरक्षक · राष्ट्रीय हिन्दू संगठन के संविधान की प्रस्तावना से (मार्गशीर्ष शुक्ल तृतीया, विक्रम संवत 2078 / 6 दिसम्बर 2021)

एक कदम राष्ट्र निर्माण की ओर

जयति जय हिन्दू राष्ट्रम्!

सनातन धर्म, सनातन संस्कृति तथा राष्ट्रीय भावना का उत्थान — यही राष्ट्रीय हिन्दू संगठन की प्रस्तावना का मूल संकल्प है।

मूल संकल्पना

संगठन के वैचारिक मूल तत्त्व

प्रस्तावना के अंतर्गत समाहित वे वैचारिक अधिष्ठान जो हमारे मार्ग का संबल हैं।

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद

हमारा राष्ट्रवाद केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है। यह सनातन संस्कृति, अध्यात्म, और ऐतिहासिक मूल्यों से पोषित एक जाग्रत सांस्कृतिक राष्ट्रवाद है।

समरस समाज भाव

समाज में समरसता का अर्थ है प्रत्येक हिन्दू भाई-बहन के प्रति पूर्ण आदर और पारिवारिक स्नेह। जातिवाद की संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर एक समरस अखंड समाज का निर्माण।

सनातन पुनर्जागरण

सनातन मूल्यों को आज की वैज्ञानिक और डिजिटल पीढ़ी के अनुकूल प्रस्तुत करना, ताकि वे हीनभावना से मुक्त होकर गर्व से कह सकें — 'हम सब सनातनी हैं'।

कार्ययोजना

प्रस्तावना के मुख्य कार्यबिंदु

हम केवल वैचारिक चर्चा नहीं करते, बल्कि धरातल पर इन पुनीत कार्यबिंदुओं को साकार करने हेतु अग्रसर हैं।

०१

वैचारिक संगठन व प्रबोधन

समाज के बौद्धिक और सांस्कृतिक जागरण के लिए निरंतर संगोष्ठियों, साप्ताहिक हिन्दू समागमों और प्रशिक्षण शिविरों का संचालन करना।

०२

पारिवारिक संस्कार सिंचन

बालकों और युवाओं के चरित्र निर्माण के लिए 'बाल संस्कार शालाओं' की स्थापना और बच्चों में देश और धर्म के प्रति नैतिक कर्तव्यों का बीजारोपण।

०३

अभावग्रस्तों का सेवा-संबल

समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार के अवसरों से जोड़कर सामाजिक सुरक्षा एवं आत्मनिर्भरता प्रदान करना।

०४

सुरक्षा व डिजिटल संबल

उन्नत तकनीकी प्रणालियों, RHS App, और शिकायत निवारण IGRS पोर्टल के जरिए समाज की समस्याओं को सुगमता से हल करना।

हमारा अगला दिशा-निर्देश

संकल्प से प्रतिज्ञा की ओर

वैचारिक संकल्पना को जीवन में आत्मसात करने के लिए संगठन की पुनीत प्रतिज्ञा को पढ़ें और सनातन की इस महान यात्रा में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लें।

संगठन की प्रतिज्ञा पढ़ें
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डैशबोर्ड

कोष-सहयोग

12A & 80G आयकर छूट युक्त राष्ट्र-समर्पण कोष

INR

दाता का विवरण (Donor Details)

80G आयकर टैक्स छूट दावा

Claim 80G Income Tax Exemption

सूचना: धारा 80G के तहत टैक्स छूट प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए वैध पैन (PAN) नंबर और पता दर्ज करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
चयनित समर्पण के लिए ही कोष आरक्षित किया जाएगा।
सुरक्षित 256-बिट SSL · RBI-अधिकृत, PCI-DSS पेमेंट गेटवे

केंद्रीय कोष-सहयोग ऑडिट (Live Audit)

कुल समर्पित राशि

₹0.00

कुल राष्ट्र-भक्त दानी

0

क्रिप्टोग्राफिक लेजर अखंडता सुरक्षित (100% Chain Valid)
Chain Sealing Key: 7a5ff4874323dd69069e406f89ae02638fca...

हालिया सार्वजनिक समर्पण (Recent Transparencies)

अभी कोई हालिया समर्पण उपलब्ध नहीं है।
पारदर्शिता गारंटी: इस कोष में किया गया प्रत्येक समर्पण प्रत्यक्ष रूप से संगठन के 'वित्त निधि' (Vitt Nithi) क्रिप्टोग्राफिक लेजर बहीखाते में दर्ज होता है, जिसे मिटाया या संशोधित नहीं किया जा सकता।

1. आयकर छूट का लाभ (80G Benefit)

राष्ट्रीय हिन्दू संगठन को आयकर विभाग द्वारा धारा 12A एवं 80G के तहत छूट प्राप्त है। आपके द्वारा किया गया दान आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80G के अंतर्गत कर कटौती (Tax Deduction) के लिए योग्य है।

2. समर्पण का श्लोक प्रमाणपत्र (Shloka Certificate)

सफल समर्पण के उपरांत, संगठन द्वारा दानकर्ता को उनकी श्रद्धा के सम्मान स्वरूप एक पवित्र वेद-मंत्र (श्लोक) अंकित विशिष्ट 'समर्पण दान-पत्र प्रमाणपत्र' एवं 80G रसीद का संयुक्त पीडीएफ (PDF) जारी किया जाता है।

3. दान का सदुपयोग (Fund Utilization)

आपके द्वारा समर्पित राशि का उपयोग पूर्णतः पारदर्शिता के साथ केवल निम्नलिखित राष्ट्र-कार्यों एवं सामाजिक सेवा प्रकल्पों में किया जाता है:

  • गौ सेवा व संवर्धन (गौशालाएँ)
  • दीन-दुखियों व असहायों को अन्नदान
  • सनातन धार्मिक व सांस्कृतिक चेतना का प्रसार
  • अनाथ व निर्धन बच्चों की शिक्षा व स्वावलंबन

"धर्मो रक्षति रक्षितः" — जो धर्म की रक्षा करते हैं, धर्म उनकी रक्षा करता है।

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