॥ कोषः धर्मस्य मूलम् ॥
वित्त संग्रह व्यवस्था
समग्र वित्त नीति – 2024 का अंग · राष्ट्रीय हिन्दू संगठन
मुख्य अवधारणा
पृष्ठ ५- ◆ चन्दा, दान अथवा सदस्यता शुल्क से होने वाली आय अनिश्चित होती है।
- ◆ चन्दा अथवा दान देने वाले संगठन पर एकाधिकार चाहते हैं उन्हे लगता है कि संगठन मेरा ही है।
- ◆ चन्दा, दान तथा सदस्यता शुल्क से प्राप्त आय के आधार पर कोई योजना लागू करना असंभव है।
- ◆ संगठन के चहुंमुखी विस्तार हेतु नियमित, निरंतर, निश्चित आय का होना अतिआवश्यक है ताकि वर्ष भर की कार्य योजना तय कर सुधार एवं प्रगति पर कार्यों को लक्ष्य किया जा सके।
- ◆ शीर्ष नेतृत्व द्वारा एक ऐसी वित्त संग्रह व्यवस्था तैयार की है जिसमे प्रत्येक सदस्य को लगे कि संगठन मेरा भी उतना ही है जितना सबका है।
मुख्य परिकल्पना
प्रत्येक सदस्य प्रति दिन एक रुपया का योगदान
(₹1 प्रतिदिन = 30 रुपये प्रतिमाह)
योजना की रुप रेखा (जनपद आधारित)
-
१
प्रत्येक जनपद के जिला प्रभारी तथा जिलाध्यक्ष अपने कार्य क्षेत्र में 5-5 ऐसे व्यक्ति चुनेंगे जो संगठन हित में एक रुपया प्रतिदिन (30 रुपये प्रतिमाह) देना स्वीकार करें।
-
२
द्वितीय — इन पाँचों को दायित्व देना है कि वे अपने जैसे 10-10 व्यक्ति तैयार करें।
-
३
तृतीय अवस्था में पुनः 10 में से प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व होगा कि वे अपने जैसे 5-5 व्यक्ति तैयार करें।
-
४
चतुर्थ अवस्था में उक्त पाँचों अपने साथ 2-2 व्यक्ति अपने जैसे तैयार करेंगे।
-
५
पांचवी अवस्था में चतुर्थ अवस्था वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने जैसे एक तैयार करेंगे।
-
६
छठवीं और अंतिम अवस्था में प्रत्येक व्यक्ति स्वयं तो योजना को स्वीकार करेगा ही साथ में हर एक व्यक्ति अपने साथ एक व्यक्ति तैयार करेगा।
◆छठवीं अवस्था के उपरान्त प्रति व्यक्ति का दायित्व होगा अपने साथ एक और व्यक्ति को प्रोत्साहित करेगा।
◆तदुपरांत यह क्रम अनवरत चलता रहेगा।
◆स्वाभाविक है कि हर वार नए व्यक्ति जुड़ेंगे, दूसरी ओर कुछ छूट भी सकते हैं फिर भी एक निश्चित नियमित आय संगठन को आती रहेगी।
◆इस आय के माध्यम से संगठन हिन्दू हित के प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति करता रहेगा।
गणितीय विधि — जिला प्रभारी / जिला अध्यक्ष
पृष्ठ ६इसे अधिक स्पष्ट रुप से गणितीय विधि से समझते हैं —
| क्रम | विवरण | गणना | दैनिक (₹) | मासिक (₹) |
|---|---|---|---|---|
| 1 | प्रथम – 5 | 5 | 5 | 150 |
| 2 | प्रत्येक 5 ने चुने 10 | 5 × 10 | 50 | 1,500 |
| 3 | इन 50 ने चुने 5-5 | 50 × 5 | 250 | 7,500 |
| 4 | इन 250 ने चुने 2-2 | 250 × 2 | 500 | 15,000 |
| 5 | ये 500 चुनेंगे 1-1 | 500 × 1 | 500 | 15,000 |
| 6 | निरन्तर 500 जोड़ने का क्रम चलता रहेगा | — | 1,305 | 39,150 |
| कुल योग | 2,610 | 78,300 | ||
आंवटन (केन्द्र – प्रदेश – जिला स्तर पर)
जिला
30%
₹23,490
प्रदेश
10%
₹7,830
केन्द्र
60%
₹46,980
कुल योग = ₹78,300
विशेष — एक रुपया प्रतिदिन के स्थान पर 30/- प्रतिमाह सुविधा जनक होगा लेने में भी और देने में भी।
रख रखाव एवं व्यय प्रणाली
पृष्ठ ७धन के रख रखाव तथा व्यय नियंत्रण हेतु व्यवस्था इस प्रकार निर्धारित की गई है।
1- धन का रख रखाव —
- –प्रत्येक जनपद स्तर पर संगठन का एक खाता होगा।
- –खाता संयुक्त बचत होगा।
- –खाते का संचालन प्रभारी तथा कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा।
- –खाता संचालन सम्बन्धित नियम परिवर्तनीय है।
- –खाता संचालन विषयक सभी बैंकिंग नियमों का अनुपालन अपरिहार्य होगा।
2- व्यय पक्ष —
आय से महत्वपूर्ण होता है व्यय पर नियंत्रण रखना अर्थात युक्ति संगत मदों में व्यय करना। अतः एक सुव्यवस्थित प्रणाली निर्धारित की गई है जो इस प्रकार है।
मुख्य अनुभाग —
(1) वित्त परामर्श दाता
किसी भी व्यय प्रस्ताव को स्वीकार, अस्वीकार अथवा संशोधित करने का अधिकार।
(2) लेखा कार
प्रत्येक आय व्यय का विवरण अभिलेखित करना।
(3) कोषाध्यक्ष
खाता संचालन, जमा एवं आहरण, एक तय सीमा तक नकद व्यय, तथा अतिरिक्त व्यय की संस्तुति करना। सम्बन्धित से व्यय के सापेक्ष प्रमाण लेना।
(4) लेखा परीक्षक
मासिक लेखा परीक्षण — व्यय का भौतिक सत्यापन, कार्य पूर्ति / उपभोग प्रमाण पत्र देना, किसी भी प्रकार के वित्तीय कदाचार की सूचना उच्च पदाधिकारी को देना।
व्यय की मदें
पृष्ठ ८नोट — नकद व्यय सीमा, अतिरिक्त व्यय हेतु संस्तुति एवं अनुमति तथा लेखा परीक्षण सम्बन्धि विशेष प्रावधान वित्तनीति – 2024 के प्रावधान के अनुसार अनुमान्य।
व्यय की मदें (जिला स्तर पर)
- 1कार्यालय पर
- 2समागम पर
- 3केन्द्र निर्दिष्ट आयोजन पर
- 4ध्वज, अंगवस्त्र, पोस्टर, बैनर तथा प्रचार सामग्री पर
व्यय की मदें (केन्द्र स्तर पर) — केन्द्र को प्राप्त 60% का
1- कार्यालय रख रखाव (वेतन, बिजली बिल, इन्टरनेट, सर्वर, इत्यादि)
3%2- आपदा राहत कोष
7%3- समागम एवं आयोजन विशेष अभियान सहित
10%4- सदस्य सहायता कोष
10%5- अवस्थापना कोष (Infrastructure) जैसे- गुरुकुल भवन, स्वरोजगार
45%6- समेकित निवेश (Corpus Fund)
25%नोट —
(1) इन सभी मदों से सम्बन्धित पूर्ण वितरण समग्र वित्त नीति 2024 मे स्पष्ट वर्णित है जो वित्त नीति के वेब पोर्टल पर है साथ ही लिखित रुप से आपको उपलब्ध करा दी जाएगी।
(2) इन सभी मदों के बैंक खाते पृथक – पृथक रखे जाएगें तथा प्रत्येक मद की स्थिति स्पष्ट रुप से ज्ञात रहे।
निरीक्षण, परीक्षण तथा आय व्यय विवरण
पृष्ठ ९निरीक्षण व्यवस्था
विधिवत अनुशीलन निरीक्षण का दायित्व निगरानी समिति का होगा।
परीक्षण व्यवस्था
सम्यक रुप से प्रत्येक अनुभाग (आय एवं व्यय) के परीक्षण का दायित्व अध्यक्ष वित्त समिति का होगा।
आय व्यय विवरण प्रस्तुति करण —
जिला स्तर पर
मासिक आधार पर (प्रति माह – माह की अंतिम तिथी को)
प्रादेशिक स्तर पर
त्रै मासिक आधार पर (31 मार्च, 30 जून, 30 सितम्बर, 31 दिसम्बर)
केन्द्र स्तर पर
अर्द्धवार्षिक तथा वार्षिक आधार पर (31 मार्च व 30 सितम्बर)
महत्वपूर्ण (ध्यान देने योग्य)
- 1-वित्त संग्रह व्यवस्था समग्र वित्त नीति – 2024 का एक अंग है अतः यह वित्त नीति – 2024 से पूर्ण रुप से अनुशासित होगा।
- 2-वित्त नीति – 2024 यथा समय आप तक पहुँचा दी जाएगी।
- 3-वित्त नीति का वेब पोर्टल निर्माण प्रक्रिया में है आकार ग्रहण करते ही सार्वजनिक कर दिया जाएगा।
- 4-वेब पोर्टल इस प्रकार तैयार किया गया है कि सम्यक आय व्यय विवरण जिला स्तर से लेकर केन्द्र तक का हर समय सब के संज्ञान में रहेगा।
- 5-वित्त समिति का वेब पोर्टल प्रकाशित होते ही पेपर वर्क समाप्त हो जाएगा।
- 6-जब प्रत्येक स्तर प्रत्येक विवरण प्रति डाला जाएगा तो वह पारदर्शी तो होगा ही साथ ही किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना शून्य हो जाएगी।
- 7-प्रत्येक व्यक्ति को प्रारम्भ में एक रसीद प्रदान की जाएगी साथ ही दूसरे माह में एक विशिष्ट पद नाम के साथ एक प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। जिसका विवरण आगे अंकित है।
कार्य विधि
पृष्ठ १०| चरण | संख्या | अवधि |
|---|---|---|
| जिला प्रभारी द्वारा चयन | 5 | 10 दिन |
| चयनित प्रत्येक 5 द्वारा 10-10 का चयन | 50 | |
| चयनित 50 द्वारा 5-5 का चयन | 250 | 20 दिन |
| चयनित 250 द्वारा 2-2 का चयन | 500 | 30 दिन |
| चयनित 500 द्वारा 1-1 का चयन | 500 | |
| कुल | दो माह |
इसके आगे प्रत्येक नया व्यक्ति एक नए व्यक्ति को जोडेगा यह क्रम अनवरत चलता रहेगा।
— प्रमाण पत्र देने हेतु विशिष्ट पद नाम —
प्रथम – 5
अति श्रेष्ठी
प्रथम – 50
महा श्रेष्ठी
प्रथम – 250
श्रेष्ठी
प्रथम – 500
सह श्रेष्ठी
द्वितीय – 500
गोलक दानी
अन्य सभी
गोलक दानी
नियम
- 1-नियत अवधि (दो माह) में पूर्ण विकसित तंत्र स्थापित करना है।
- 2-प्रति माह के संग्रह हेतु अति श्रेष्ठी उत्तरदाई होंगे जिन्हे महा श्रेष्ठी, श्रेष्ठी तथा सह श्रेष्ठी का सहयोग प्राप्त होगा।
- 3-संग्रहीत धन कोषाध्यक्ष के पास उसी दिन या अधिकतम अगले दिन जमा कराना अनिवार्य होगा।
- 4-अध्यक्ष वित्त समिति सम्पूर्ण जनपद के संग्रह के लिए जिम्मेदार होंगे।
- 5-वित्त समिति का वेब पोर्टल सक्रिय होने तक प्रतिमाह लिखित रुप से विवरण प्रस्तुत किया जाना है।
अति विशेष — वित्त संग्रह तंत्र का विकसित न होना अथवा विकसित हो कर असफल होने का सीधा अर्थ है राष्ट्रीय हिन्दू संगठन का असफल होना अर्थात हमारे हिन्दू राष्ट्र के स्वप्न पर तुषाराघात होना।
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