संगठन के संकल्प
११ मूलभूत संकल्प जो हमारे अखण्ड हिन्दू राष्ट्र निर्माण के ध्येय को परिभाषित करते हैं
राष्ट्रीय हिन्दू संगठन की स्थापना का मूल प्रयोजन हिन्दू समाज को जाग्रत करना, उसे संगठित करना और अखण्ड हिन्दू राष्ट्र का निर्माण करना है। हमारे संविधान में वर्णित ११ मूलभूत संकल्प निम्नलिखित हैं:
हिन्दू जागरण एवं संगठन
सनातन धर्म एवं संस्कृति की रक्षार्थ हिन्दू भाईयों को जागरूक एवं संगठित करना।
अखण्ड हिन्दू राष्ट्र
अखण्ड हिन्दू राष्ट्र का निर्माण करना।
गौवंश संरक्षण
गौवंश का संरक्षण एवं संवर्धन करना।
समाज का क्षरण रोकना
हिन्दू एवं हिन्दू धर्म पर हो रहे आन्तरिक एवं बाह्य आघातों को समाप्त करके, क्षरण को रोकना।
सामाजिक समरसता
समस्त सामाजिक विसंगतियों को समूल नष्ट करके समाज में समरसता लाने का कार्य करना।
आघातों पर प्रतिघात
हिन्दू धर्म पर होने वाले आघातों पर प्रतिघात करना। जो हिन्दुत्व के विरोधी एवं क्षय कारी हों उनका सामना और निर्मूलन करना।
समर्थकों का सहयोग
ऐसे सभी व्यक्तियों/संस्थाओं का सहयोग व समर्थन करना जो हिन्दुत्व एवं सनातन धर्म के समर्थक हों।
गुरुकुल पद्धति एवं शिक्षा
समाज के सभी वंचित एवं निर्बल वर्ग के बच्चों को रोजगार परक शिक्षा की व्यवस्था गुरुकुल पद्धति से करना।
राष्ट्रीय भाषा एवं देवनागरी
भारत की राष्ट्रीय भाषा एवं देवनागरी लिपि को समुचित स्थान दिलाना तथा संस्कृत भाषा को समुचित सम्मान प्रदान करना।
गैर-भारतीय भाषाओं का बहिष्कार
गैर भारतीय भाषाओं का बहिष्कार करना।
विश्वव्यापी हिन्दू सहायता
प्रत्येक हिन्दू चाहे वह भारत का निवासी हो या भारतीय मूल का एन.आर.आई. — बिना किसी भेद के अर्थात लिंग, जाति, भाषा, क्षेत्र अथवा वर्ण का भेद किये बिना, समुचित सहायता करना।
इन संकल्पों की पूर्ति के लिए हमें संगठित शक्ति की आवश्यकता है। आइए, अखण्ड हिन्दू राष्ट्र निर्माण की इस पुनीत यात्रा में सहभागी बनें।
जयति जय हिन्दू राष्ट्रम्!